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भ्रूण हत्या करना सबसे बड़ा पाप –  कथा वाचक राष्ट्रीय संत डॉ. दुर्गेश आचार्य

by anumannews
 
उत्तरकाशी (कीर्ति निधि सजवाण):  विश्व ब्रहमाण्ड में जब हम भगवान को ही देखते तभी हम वसुदेव कहलाते हमारी दृष्टि में जब देव भाव आता तभी हम देवकी बनते वसुदेव-देवकी जीवन-चरित्र बनाने से ही भगवान श्री कृष्ण जीवन में आते और संसार के माया के बंधन जंजीर बेड़ियां तू जाती हैं। उक्त प्रवचन राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेशाचार्य ने   सरनौल गांव में चल रही श्रीमद्भागवत के पांचवें दिन प्रवचन करते हुये कहा कि ये इंद्रियों के द्वारपाल परम विश्राम में सो जाते हैं। ये इंद्रिया तभी तक विषयों की ओर दौड़ रही जब तक, प्रभुनही मिले प्रभु दर्शन पाते ही मे परम शांत हो जाती है ।इंद्रियों के प्रभु में समावे से ये शरीर ही गोकुल बन जाता जहा ये इंद्रिय रूपी गोपी प्रभुप्रेम में लीन होने से मे जीवन ही वृन्दावन धाम बन जाता है । भौतिकवादी युग में प्रभुके पावन संदेश को जीवन मेडतारने से ही जीव परमानन्द ब्रहम को पा सकता है।
 कथा वाचक राष्ट्रीय संत डॉ दुर्गेशाचार्य महाराज ने भ्रूण हत्या करना सबसे बड़ा पाप बताया। उन्होंने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा देते हुये कथा प्रेमियों से आव्हान किया। इस ओर पर जिला पंचायत पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण, गांव कपिल देव रावत, सेवानिवृत्त तहसीलदार चंडी प्रसाद सेमवाल, स्कूल में मार्कंडेय सेमवाल, धराली क्षेत्र पंचायत सदस्य विजय रावत, मधुसूदन नौटियाल, प्रकाश सेमवाल, सहित सैंकड़ों भागवत प्रेमी मौजूद रहे हैं ।